AWAKE


Patience, Adaptibility , Dependability-

The essence of India’s womanhood ;

Is it vacant yearnings for reciprocation ?

Or non recognition of idealistic opportunities ?

Always for a good cause the World

 doesn’t see

Nor appreciate ! Your threshold of liberation beckons

Yet tradition stays the hand of change !

Your tender heart hates to hurt but in turn is hurt ;

Awakenings stir but do not bloom,

Is it fruitlessness in self expression ?

It’s not weakness but your strength

Of misguided conviction, faith and hope :

That men will mellow towards external selflessness

Nay lady- Wait No More

The World Needs Your Sweat

And Not Tears Of Passive Servitude

  


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विसंबधन

कुछ ही वक़्त गुज़रा है

क़रीब थे जब तुम मेरे

पर वह अंतरंगता कहीं गुम गयी

कभी भावनाओं को अवरूद्ध करते

कभी संवेदना को निषेध करते

जितना चाहा कि तुम्हें खींच लूँ

इन बाधाओं से परे

तुम आदतन दूर होते गये

थक कर छोड़ दिये मैंने प्रयास

अहं की दीवार से बार बार

टकराने की वेदना से घबराकर

सोचा शायद एक दिन यह बाधाएँ

जो तेरे मेरे बीच में है

स्वयं ही विलुप्त हो जायेगी

परन्तु यह हाथ भर की दूरी

मीलों का फ़ासला बन गयी

आज जब बात होती है तुमसे

तो सुनती हूँ सिर्फ़ शब्द

कुछ मामूली से

कुछ ग़ैरज़रूरी से

शब्द जिनमें दिल नहीं होता

शब्द जिनसे दिल नहीं धड़कता

डर जाती हूँ मैं

इस फ़ासले से

इस विसंबधन से

यह पृथकता निराश करती है मुझे

यक़ीन हो जाता है कि पराजित हैं

हम दोनों ही

इस खेल को जीतने के लिए

जिसमें कौन दूसरे की परवाह कम करता है

क्या यह खेल प्रेम की परिभाषा के

विपरीत नहीं खेल रहें हैं हम?


-शालिनी

  

ज़ख़्म 

खुदा अच्छा किया जो तूने

दिल शीशे के नहीं बनाये

उसके हाथों के ज़ख़्म

हमसे बार बार देखे नहीं जाते

– शालिनी

Translation into English—

Thank you God!

For not making

Hearts of glass

I couldn’t have seen

His wounded hands

Again and again!