बेपरवाह

तेरी यादों की बारिश भी

नाकाम है अब मुझे भिगोने में

बेपरवाई की छतरी तानें

तनहा हूँ पर बेहद महफ़ूज़ मैं

  

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ख़ामोश 

खामोश है क़लम मेरी

बेदाग़ हैं लमहों के पन्ने 

तेरा ज़िक्र करने से भी

क़तराते हैं अब अल्फ़ाज़ मेरे