हमसफर

तेरी धड़कन बिगड़ी तो मन ने चाहा

सीने को तेरे मैं अपना दिल दे दूँ

 जब तक चलें यह सांसे मेरी

घूलती रहें इनमें बातें तेरी

कानों मे मेरे हरदम 

सुर तेरी हँसी का हो

शोर तेरे ठहाकों का हो

ज़िंदगी की किताब में

बचे है कितने पन्ने कोरे अभी 

मिल कर लिखने है हमें

इसमें अभी अफ़साने कई

उठो!नफज मे भर लो स्याही नयी

यह महज़ पड़ाव है या बस

राह बदलने का कोई इशारा 

तेरे मेरे क़दमों ने तय करने हैं

मेरी जान! अभी सफ़र कई

थाम हाथ चलो फिर मेरा 

सुनो! पुकार रहीं हैं हमें मँजिल कई

जगह कहाँ आँखों में अश्क़ों की 

बिखरे हैं इनमें अधूरे ख़्वाब कई

अधूरे वादे हैं कुछ,जो पूरे अभी करने हैं

कुछ शिकवे भी बाक़ी हैं जो

तुम्हें मुझसे और मुझे तुमसे करने हैं

देखो मुस्कुराकर मेरी आँखों में

बन हिना तेरे नाम की

यह अश्क़ सजा देंगे हथेलियाँ मेरी

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