नया साल

चंद लमहों में बदल जायेगा 

तारीख़ों का क़ैदी 

कलेंडर का ग़ुलाम 

यह जाता साल

यह नया साल

 क्या अलविदा कहें इसे

क्यों जश्न मनाये इसका

यह जाता साल

यह नया साल

काश ! आज डूबते सुरज

और कल उगते सुरज

के दरमियाँ बीतते लमहों में

महज़ कलेंडर न बदलता

यह वक़्त बदल जाता

दोस्तों ! 
बदलते साल की यही कामना है मेरी

जो ख़ुश हैं उनका वक़्त थम जाये

जो दुखी हैं उनका वक़्त बदल जाये

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