कलम

स्याही दर्द की ख़त्म हो गयी
या नोक टूट गयी जखम कुरेदते
या लफ़्ज़ों को इनकार अब तेरे ज़िक्र से है
थम गयी है कयूँ मेरी क़लम चलते चलते

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