एक पाती सैनिक की

गोली खाता हूँ मैं हँसते हँसते अपने सीने पे
लहू बहा देता हूँ अपना तिरंगे की आन पे

रातों जागता हूँ मैं तुम्हारी नींद के ख़ातिर

मौत लगाता हूँ गले तुम्हारी जान के ख़ातिर

बीवी बच्चों से अपने रहता मैं दूर हूँ

माँ-बाप की सेवा करने से मजबूर हूँ

देश सेवा ही काम है मेरा , मैं मानता हूँ

ईमानदारी से करना अपना काम मैं जानता हूँ

दुश्मन को चीर दूँ यह ताक़त मैं रखता हूँ

आदेश तक खामोश रहने का साहस रखता हूँ

मेरे सिर पर पड़ा पतथर देश पर वार है

मेरे गाल पर थप्पड़ आपका अपमान है

मेरी बन्दूक़ की गोली में भी अनुशासन है

यह बिगड़ते हालात आपका कुशासन है

हंस के खा लूगा मैं जली रोटी और बारूद

मेरे नाम पे राजनीति की रोटी सेंकना छोड़ दो

शहादत पे मेरी बेशक चंद आँसू न बहाना

दुश्मन के झंडे मेरी ज़मीन पे फहराना छोड़ दो

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