शायर की दुआ

मेरी कलम में वह हुनर दे खुदा

काग़ज़ के सीने में दिल धड़क जाये

मेरी स्याही की तासीर कुछ ऐसी हो

दर्द को उकारे और मलहम हो जाये

मेरे लफजों में दे कुछ ऐसा असर

समझे पुतला और इंसान हो जाये

मेरी नज़्मों में शिद्दत हो इस क़दर प्यार की

वाह! वाह! नाखुदा करे और खुदा हो जाये

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