जीत रावण की

फिर जल जायेगा पुतला आज 
रावण भीतर पर बच जायेगा

चोला पहन राम नाम का

फिर सीता कोई हर जायेगा

रावण माना अभिमानी था

फिर भी संयमी ज्ञानी था

हर ले गया सीता को पर

शील पे नज़र न डाली थी

आज घर घर में दानव हैं 

न राम हैं ये न ही रावण हैं

अपनी बेटियों को ही लूट रहे

इंसान अब ऐसा दुष्ट प्राणी हैं

हर साल पुतला जलता जब

रावण अट्टहास है करता तब

राम एक ही बार जीता मुझसे

मेरी विजय रोज होती उस पर

-मेजर (डा) शालिनी सिंह

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