अकसर 

अकसर देखा है मैंने 
उन्हे ख़ुद से जंग लड़ते हुये

शांति का परचम थामे जो

मौन खड़े मुस्करा रहे थे 

अकसर देखा है मैंने

उन्हें ज़िंदा लाश बनते हुये

मुद्ददत से काँधो पे जो

रिश्तों के जनाज़े उठा रहे थे

अकसर देखा है मैंने

उन्हें शिगाफ होते हुये

औरों की बताई जिंदगी जो

एक उमर से जीते जा रहे थे

अकसर देखा है मैंने 

उन्हें बेसबब भटकते हुये

भीड़ का हिस्सा बन जो

मँजिल तलाशे जा रहे थे

अकसर देखा है मैंने 

उन्हें ख़ंजर की धार बनाते

बातों की चाशनी में जो

मुझे डुबाये जा रहे थे

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