राष्ट्रीय गान

सच कहते हो तुम
बिलकुल सच

राष्ट्रीय गान पे खड़े होने से 

देशभक्त नहीं बन सकते

तुम तो हरगिज़ नहीं

सच कहते हो तुम

बिलकुल सच

देशभक्ति दिल में होती है

बाहर से थोपी नहीं जा सकती

तुम पे तो हरगिज़ नहीं

सच यह भी है

बिलकुल सच

दिल मे देशभक्ती होती अगर

जुबाँ पे तुम्हारे इंकार न होता

बरबस खड़े होते राष्ट्रीय गान पे

थोपे जाने का मन मे मलाल न होता

सच यह भी है

दुखद सच

न्यायालय देता है आदेश

नहीं आवश्यक तुम्हारा खड़ा होना

जाओ कह दो सीमा पे तैनात उस फ़ौजी से भी 

नहीं आवश्यक तिरंगे में लिपट घर लौटना

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